“यार, ITR कैसे भरें? CA के पास जाने का टाइम नहीं है। खुद भरूं? पर कैसे?”
अगर यह सवाल आपके दिमाग में भी है, तो अकेले नहीं हैं। हर साल करोड़ों लोग ITR भरते हैं। और हर साल लाखों लोग गलत फॉर्म चुनने, डेडलाइन मिस करने, या छोटी-छोटी गलतियों की वजह से नोटिस झेलते हैं।
बजट 2026 के बाद टैक्स सिस्टम में कुछ बदलाव हुए हैं:
- 1 अप्रैल 2026 से नया टैक्स कानून लागू (Income Tax Act 2025)
- बिना ऑडिट वालों के लिए ITR डेडलाइन: 31 अगस्त 2026
- सैलरीड कर्मचारियों (ITR-1, ITR-2) के लिए डेडलाइन: 31 जुलाई 2026
- रिवाइज्ड रिटर्न भरने की डेडलाइन: 31 मार्च 2027
- नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट (पुरानी चुनने के लिए ऑप्ट-इन करना होगा)
आज के इस आर्टिकल में हम स्टेप बाय स्टेप समझेंगे – ITR कैसे भरें, कौन सा फॉर्म चुनें, क्या-क्या डॉक्यूमेंट चाहिए, और कैसे गलतियों से बचें। तैयार हैं? चलिए शुरू करते हैं।
Step 1: ITR क्यों भरना है?
कई लोग सोचते हैं – TDS कट गया, अब ITR क्यों भरूं? इसलिए भरें:
5 बड़े फायदे:
- टैक्स रिफंड पाने के लिए – अगर TDS ज्यादा कटा है, तो सरकार आपको पैसे वापस करेगी।
- लोन के लिए – बैंक ITR देखता है। बिना ITR के होम/कार लोन मुश्किल।
- वीजा के लिए – विदेश यात्रा के लिए ITR एक जरूरी दस्तावेज।
- क्रेडिट कार्ड/सीबिल स्कोर – ITR से इनकम वेरिफाई होती है, स्कोर बेहतर बनता है।
- सरकारी निविदाओं/टेंडर के लिए – बिजनेस वालों के लिए जरूरी।
किसे भरना जरूरी है?
- सैलरी 2.5 लाख से ज्यादा (सीनियर सिटीजन के लिए 3 लाख)
- फॉरेन ट्रैवल किया हो (1 लाख से ज्यादा खर्च)
- बिजनेस/प्रोफेशनल इनकम
- बैंक में 1 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर
- शेयर/म्यूचुअल फंड ट्रेडिंग
Step 2: कौन सा ITR फॉर्म चुनें? (सबसे कॉमन कन्फ्यूजन)
यह सबसे बड़ी गलती है। गलत फॉर्म चुना, तो रिटर्न रिजेक्ट। सीधा समझिए:
| आपकी स्थिति | कौन सा फॉर्म |
|---|---|
| सिर्फ सैलरी, पेंशन, ब्याज आय (एक प्रॉपर्टी से किराया) | ITR-1 (सहज) |
| सैलरी + कैपिटल गेन (शेयर/म्यूचुअल फंड बेचे हों) | ITR-2 |
| सैलरी + फ्रीलांस/प्रोफेशनल इनकम (44ADA लागू) | ITR-4 (सुगम) |
| बिजनेस/प्रोफेशन (पूरा हिसाब-किताब) | ITR-3 |
| फर्म, एलएलपी, सोसायटी | ITR-5, ITR-6, ITR-7 (अलग) |
2026 में नया: ITR-1 अब उन लोगों के लिए नहीं जिनकी टोटल इनकम 50 लाख से ज्यादा है। ITR-2 या ITR-3 चुनना होगा।
Step 3: डॉक्यूमेंट्स तैयार करें
पहले ये डॉक्यूमेंट्स जुटा लें। ITR भरना आधा हो जाएगा।
सैलरीड के लिए:
- फॉर्म 16 (कंपनी से मिलता है, Part A और Part B दोनों)
- फॉर्म 16A (अगर कोई और TDS कटा है)
- फॉर्म 26AS (जितना TDS कटा, सब यहाँ दिखता है)
- बैंक स्टेटमेंट (ब्याज आय के लिए)
फ्रीलांसर/बिजनेस के लिए:
- सालभर के रिसीट्स और बिल्स
- खर्चों के बिल और पेमेंट प्रूफ
- एडवांस टैक्स चालान (अगर भरा हो)
- GST रिटर्न का सारांश (अगर रजिस्टर्ड हैं)
इन्वेस्टर्स के लिए:
- म्यूचुअल फंड/शेयर की सालाना स्टेटमेंट
- कैपिटल गेन का कैलकुलेशन
Step 4: नई vs पुरानी टैक्स व्यवस्था का फैसला करें
1 अप्रैल 2026 से नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट है। पुरानी चुनने के लिए ऑप्ट-इन करना होगा।
नई व्यवस्था:
- 4 लाख तक टैक्स जीरो, 12 लाख तक रिबेट से जीरो टैक्स
- 80C, 80D, HRA, होम लोन जैसी छूत नहीं
- स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 (सैलरी वालों के लिए)
पुरानी व्यवस्था:
- 80C में 1.5 लाख, 80D, HRA, होम लोन ब्याज (2 लाख)
- स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000
- टैक्स दरें ज्यादा (10 लाख के बाद 30%)
कैसे तय करें:
- अगर कुल डिडक्शन 4.5 लाख से कम हैं → नई व्यवस्था
- अगर कुल डिडक्शन 4.5 लाख से ज्यादा हैं → पुरानी व्यवस्था
- सैलरी 12.75 लाख से कम है → नई व्यवस्था ही बेहतर
ITR फॉर्म भरते वक्त यह ऑप्शन चुनना होगा। बिना बिजनेस इनकम वाले सैलरीड कर्मचारी हर साल दोनों के बीच स्विच कर सकते हैं।
Step 5: ITR भरना शुरू करें (प्रैक्टिकल गाइड)
दो तरीके हैं:
- इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट: incometax.gov.in
- थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म: ClearTax, TaxSpanner, Quicko
हम विभाग की वेबसाइट से समझते हैं।
5.1 लॉगिन करें
- वेबसाइट पर जाएं, पैन कार्ड से लॉगिन करें
- पासवर्ड और कैप्चा डालें
- डैशबोर्ड पर जाएं
5.2 ITR फॉर्म सेलेक्ट करें
- ‘e-File’ > ‘Income Tax Return’ > ‘File Income Tax Return’
- असेसमेंट ईयर चुनें: 2026-27 (FY 2025-26 के लिए)
- ITR फॉर्म चुनें (ऊपर देखा था कौन सा फॉर्म)
- कारण बताएं (आमतौर पर ‘सैलरी/पेंशन’)
5.3 प्री-फिल्ड डेटा चेक करें
- फॉर्म 26AS ऑटो-पॉपुलेट हो जाता है
- सैलरी, ब्याज, TDS सब प्री-फिल्ड होगा
- सावधानी से चेक करें, कहीं कोई आइटम मिस तो नहीं
5.4 टैक्स सेविंग डिटेल्स भरें (अगर पुरानी व्यवस्था चुनी है)
- सेक्शन 80C (PPF, ELSS, LIC, फीस)
- सेक्शन 80D (हेल्थ इंश्योरेंस)
- होम लोन ब्याज (सेक्शन 24b)
- HRA (अगर किराए पर रहते हैं)
- NPS (सेक्शन 80CCD)
5.5 टैक्स कैलकुलेशन देखें
- सारा डेटा भरने के बाद ‘Calculate Tax’ बटन दबाएं
- स्क्रीन पर दिख जाएगा कि कितना टैक्स बन रहा है
- अगर TDS ज्यादा कटा है, तो रिफंड दिखेगा
- अगर टैक्स कम भरा है, तो ड्यू दिखेगा
5.6 वेरिफिकेशन करें
- पूरा फॉर्म चेक करें
- सबमिट करने से पहले एक बार ड्राफ्ट डाउनलोड करके देखें
- फिर सबमिट करें
Step 6: ITR वेरिफिकेशन (सबसे जरूरी)
ITR फाइल करने के बाद वेरिफिकेशन अनिवार्य है। बिना वेरिफिकेशन के रिटर्न फाइल नहीं माना जाता।
वेरिफिकेशन के तरीके:
- आधार ओटीपी (सबसे आसान): EVC जनरेट करें, आधार से लिंक मोबाइल पर ओटीपी आएगा, डालें और फाइनल करें।
- नेट बैंकिंग: अपने बैंक अकाउंट से लॉगिन करें और EVC जनरेट करें।
- बैंक एटीएम: कुछ बैंक्स में एटीएम से EVC जनरेट कर सकते हैं।
- डिमैट अकाउंट: CDSL/NSDL EVC सुविधा देते हैं।
- फिजिकल ITR-V: अगर कोई ऑप्शन नहीं है, तो ITR-V फॉर्म प्रिंट करें, साइन करें, बैंगलोर CPC पर 120 दिन के अंदर पोस्ट करें।
कब तक वेरिफाई करें: ITR फाइल करने के 30 दिन के अंदर वेरिफाई करना जरूरी है।
Step 7: डेडलाइन याद रखें (2026 के लिए)
| केस | डेडलाइन |
|---|---|
| सैलरीड (ITR-1, ITR-2) | 31 जुलाई 2026 |
| बिना ऑडिट वाला बिजनेस (44ADA, 44AD) | 31 अगस्त 2026 |
| ऑडिट वाला बिजनेस | 31 अक्टूबर 2026 |
| बेलिगेंट रिटर्न (डेडलाइन के बाद) | 31 दिसंबर 2026 (पेनल्टी के साथ) |
| रिवाइज्ड रिटर्न | 31 मार्च 2027 |
ध्यान दें: 31 अगस्त 2026 की डेडलाइन बिना ऑडिट वाले बिजनेस/प्रोफेशनल इनकम वालों के लिए है। सामान्य सैलरीड के लिए 31 जुलाई ही है।
Step 8: लेट ITR भरने पर क्या होगा? (पेनल्टी और नुकसान)
अगर डेडलाइन मिस कर दी, तो:
- पेनल्टी (सेक्शन 234F):
- 5 लाख तक की इनकम पर: 1,000 रुपए
- 5 लाख से ज्यादा इनकम पर: 5,000 रुपए
- ब्याज (सेक्शन 234A):
- 1% प्रति महीना (बकाया टैक्स पर)
- डेडलाइन से लेकर फाइल करने तक
- रिफंड का नुकसान: अगर TDS ज्यादा कटा है और रिफंड आना था, तो देर से फाइल करने पर ब्याज नहीं मिलता।
- बेलिगेंट रिटर्न: 31 दिसंबर 2026 के बाद फाइल करना मुश्किल। पुरानी गलतियाँ सुधारने का मौका खत्म।
- नोटिस का जोखिम: लगातार ITR न फाइल करने पर स्क्रूटनी नोटिस।
Step 9: कॉमन गलतियाँ और कैसे बचें
| गलती | कैसे बचें |
|---|---|
| गलत ITR फॉर्म चुनना | ऊपर दिया चार्ट देखें |
| बैंक ब्याज न दिखाना | फॉर्म 26AS और बैंक स्टेटमेंट मैच करें |
| TDS का क्लेम न करना | फॉर्म 16 और 16A दोनों चेक करें |
| कैपिटल गेन न दिखाना | शेयर/एमएफ बेचा है तो ITR-2 या 3 चुनें |
| पुरानी और नई में कन्फ्यूजन | पहले कैलकुलेट करें, फिर चुनें |
| वेरिफिकेशन न करना | 30 दिन के अंदर EVC या फिजिकल करें |
| बिना सबूत के खर्चे दिखाना | सभी बिल्स और पेमेंट प्रूफ रखें |
Step 10: ITR के बाद क्या? (पोस्ट-फाइलिंग)
1. ITR प्रोसेसिंग:
- ऑनलाइन वेरिफाई किया है तो 15-30 दिन में प्रोसेस हो जाता है
- फिजिकल वेरिफाई किया है तो 3-4 महीने लग सकते हैं
2. इंटीमेशन लेटर (सेक्शन 143(1)):
- प्रोसेस होने के बाद आता है
- चेक करें कि सब डेटा सही है या नहीं
3. रिफंड:
- अगर TDS ज्यादा कटा है, तो रिफंड बैंक अकाउंट में आता है
- रिफंड स्टेटस पोर्टल पर चेक कर सकते हैं
4. नोटिस (अगर कोई गड़बड़ी है):
- अगर कोई डिस्क्रेपेंसी मिली, तो ई-नोटिस आएगा
- पोर्टल पर रिस्पॉन्स करें या CA से सलाह लें
5. रिवाइज्ड रिटर्न:
- अगर बाद में कोई गलती पता चली, तो 31 मार्च 2027 तक रिवाइज्ड फाइल कर सकते हैं
निष्कर्ष: ITR भरना अब आसान
2026 में ITR भरना पहले से आसान हो गया है। सारा डेटा प्री-फिल्ड आता है, पोर्टल इस्तेमाल करना आसान है, और सही गाइडेंस मिल जाए तो CA की जरूरत नहीं।
आपके लिए 10 मिनट का एक्शन प्लान:
- अभी से डॉक्यूमेंट्स जुटाना शुरू करें। फॉर्म 16, 26AS, बैंक स्टेटमेंट, इन्वेस्टमेंट प्रूफ – सब इकट्ठा कर लें।
- सही ITR फॉर्म चुनें। अपनी स्थिति के हिसाब से ITR-1, 2, 3 या 4 सेलेक्ट करें।
- नई vs पुरानी व्यवस्था का कैलकुलेशन करें। 4.5 लाख से ज्यादा डिडक्शन है तो पुरानी वरना नई।
- जल्दी फाइल करें। 31 जुलाई या 31 अगस्त 2026 से पहले भर लें।
- तुरंत वेरिफाई करें। आधार ओटीपी से 2 मिनट में करें।
याद रखें: ITR सिर्फ एक कानूनी औपचारिकता नहीं है। यह आपकी वित्तीय पहचान है। सही और समय पर ITR फाइल करना आपके भविष्य के हर बड़े फैसले (लोन, वीजा, इन्वेस्टमेंट) में काम आता है।
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार का निवेश निर्णय लेने से पहले स्वयं रिसर्च करें या किसी योग्य वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह लें। ProgressFile.in किसी भी लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं है।
